उषा उत्थुप: नाइट क्लब से निकली वो आवाज़, जिसने बनाई दुनिया में अलग पहचान

लोकप्रिय इंडी पॉप सिंगर के रूप में उषा उत्थुप का देसी-रूटेड विश्वास है जहां वो बिना चूके यह कहती ही हैं कि मैं हूँ मद्रासी, बॉर्न ऐंड ब्रॉट अप इन बॉम्बे, मैरीड इंटू केरला, लिविंग इन बेंगॉल… तो मैं सच्चे दिल से कहती हूँ, मैं हूँ भारतवासी.

भारतीय संगीत जगत में कुछ ही कलाकार ऐसे हैं, जिनकी आवाज़ और शैली ने दशकों तक सुनने वालों के दिलों पर राज किया है और यह सिलसिला आज भी जारी है.

उषा उत्थुप को इंडी पॉप और जैज़ संगीत की रानी कहा जाता है. उनकी अनूठी, गहरी आवाज़ ने ना केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी छाप छोड़ी है.

वो हमेशा कहती हैं कि आप कितने अच्छे या कितने बुरे गायक हैं, इससे बड़ी बात ये है कि आप कितने ओरिजिनल गायक हैं. उषा उत्थुप का संगीत नई और पुरानी पीढ़ियों को समान रूप से जोड़ता है.

उनकी ऊर्जा और उत्साह आज भी बरकरार है.

उषा उत्थुप का जन्म भारत की आज़ादी के तीन महीने बाद मुंबई में एक तमिल परिवार में हुआ था.

उनका बचपन संगीत से भरा था, क्योंकि उनके घर में हमेशा विभिन्न शैलियों का संगीत गूंजता रहता था.

छह भाई बहनों में पांचवे नंबर की उषा उत्थुप ने 1969 में चेन्नई में मंच पर पहला गाना गाया था. उस गाने के बाद जो तालियों की गूँज उठी, वो आज तक उन्हें याद है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत नाइट क्लबों में गाने से की, जहां उनकी अनोखी आवाज़ और मंच पर जीवंत प्रस्तुति ने लोगों का ध्यान खींचा. उस दौर में पश्चिमी संगीत और जैज़ भारत में ज़्यादा प्रचलित नहीं थे, लेकिन उषा ने इसे अपनी ताकत बनाया और सुनने वालों के सामने एक नया अनुभव पेश किया.

उषा उत्थुप की लोकप्रियता तब बढ़ी, जब उन्होंने हिंदी फ़िल्मों में गाना शुरू किया.

1970 और 1980 के दशक में उनके गाने जैसे “हरि ओम हरि” (फ़िल्म: प्यारा दुश्मन), “रंभा हो” (फ़िल्म: अरमान) और “वन टू चा चा चा” ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया.

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